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विवशता

>> गुरुवार, 12 अप्रैल 2007

कुछ चिट्ठों पर टिप्पणी देने के लिए ब्लॉगर या गूगल खाते से साइन इन करना होता है। इस विवशता का परिणाम है यह।
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6 टिप्पणी:

अतुल शर्मा 10 अप्रैल 2007 को 2:51 pm  

विवशता ही सही खाता तो खोला।

Ashok 17 मई 2007 को 8:34 am  

अतुल जी आप ने जो सुरुआत कि है, भले ही विवशता मैं आकर , उम्मीद है कि आप आगे भी हिंदी मैं ब्लोग्गिंग करते रहेंगे और हिंदी पाठको को अपने विचारो से अवगत कराते रहेंगे।

सुभ कामनाओ सहित, आपका मित्र अशोक शर्मा.

हितेंद्र कुमार गुप्ता 14 सितंबर 2009 को 8:47 pm  

Bahut Barhia... aapka swagat hai... isi tarah likhte rahiye

Please Visit:-
http://hellomithilaa.blogspot.com
Mithilak Gap...Maithili Me

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Manpasand Gaane

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Aapke Bheje Photo

संगीता पुरी 15 सितंबर 2009 को 6:09 am  

हिन्‍दी दिवस के दिन आपके इस नए चिट्ठे के साथ आपका स्‍वागत है .. ब्‍लाग जगत में कल से ही हिन्‍दी के प्रति सबो की जागरूकता को देखकर अच्‍छा लग रहा है .. हिन्‍दी दिवस की बधाई और शुभकामनाएं !!

Amit K Sagar 16 सितंबर 2009 को 4:01 pm  

ब्लोगिंग जगत में आपका स्वागत है. आपको पढ़कर बहुत अच्छा लगा. सार्थक लेखन हेतु शुभकामनाएं. जारी रहें.


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Till 25-09-09 लेखक / लेखिका के रूप में ज्वाइन [उल्टा तीर] - होने वाली एक क्रान्ति!

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